2-Ayodhyakand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 9 / Shloka 36 Ayodhyakand

Kand 2-Ayodhyakand
Sarga 9
Shloka 36

Ayodhyakand

119 Sarga
66 Shloka
2/9/36
2-Ayodhyakand / Sarga 9 Shloka 36
Shloka
रामाभिषेकसंकल्पान्निगृह्य विनिवर्तय।
अनर्थमर्थरूपेण ग्राहिता सा ततस्तया॥ ३६॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

ऐसी बातें कहकर मन्थराने कैकेयीकी बुद्धिमें अनर्थको ही अर्थरूपमें जँचा दिया। कैकेयीको उसकी बातपर विश्वास हो गया और वह मन-ही-मन बहुत प्रसन्न हुई। यद्यपि वह बहुत समझदार थी, तो भी कुबरीके कहनेसे नादान बालिकाकी तरह कुमार्गपर चली गयी—अनुचित काम करनेको तैयार हो गयी। उसे मन्थराकी बुद्धिपर बड़ा आश्चर्य हुआ और वह उससे इस प्रकार बोली—॥ ३६-३७॥