2-Ayodhyakand / Sarga 78
Shloka 22
Shloka
हन्याम् अहम् इमाम् पापाम् कैकेयीम् दुष्ट चारिणीम् ।यदि माम् धार्मिको रामः न असूयेन् मातृ घातकम् ॥२-७८-२२॥
