2-Ayodhyakand / Sarga 77
Shloka 14
Shloka
वर दानमयो अक्षोभ्यो अमज्जयत् शोक सागरः ।सुकुमारम् च बालम् च सततम् लालितम् त्वया ॥२-७७-१४॥
Sarga 77 / Shloka 14 Ayodhyakand