2-Ayodhyakand / Sarga 75
Shloka 45
Shloka
यद् अग्नि दायके पापम् यत् पापम् गुरु तल्पगे ।मित्र द्रोहे च यत् पापम् तत् पापम् प्रतिपद्यताम् ॥२-७५-४५॥
