2-Ayodhyakand / Sarga 75
Shloka 16
Shloka
इदम् हि तव विस्तीर्णम् धन धान्य समाचितम् ।हस्ति अश्व रथ सम्पूर्णम् राज्यम् निर्यातितम् तया ॥२-७५-१६॥
Sarga 75 / Shloka 16 Ayodhyakand