2-Ayodhyakand / Sarga 74
Shloka 13
Shloka
किम् न अवबुध्यसे क्रूरे नियतम् बन्धु सम्श्रयम् ।ज्येष्ठम् पितृ समम् रामम् कौसल्याय आत्म सम्भवम् ॥२-७४-१३॥
