2-Ayodhyakand / Sarga 72
Shloka 53
Shloka
त्वत् कृते हि मया सर्वम् इदम् एवम् विधम् कृतम् ।मा शोकम् मा च सम्तापम् धैर्यमाश्रय पुत्रक ॥२-७२-५३॥
त्वदधीना हि नगरी राज्यम् चैतदनामयम् ।
