2-Ayodhyakand / Sarga 72
Shloka 4
Shloka
सा तम् मूर्ध्नि समुपाघ्राय परिष्वज्य यशस्विनम् ।अङ्के भरतम् आरोप्य प्रष्टुम् समुपचक्रमे ॥२-७२-४॥
Sarga 72 / Shloka 4 Ayodhyakand