2-Ayodhyakand / Sarga 71
Shloka 44
Shloka
मलिनम् च अश्रु पूर्ण अक्षम् दीनम् ध्यान परम् कृशम् ।सस्त्री पुम्सम् च पश्यामि जनम् उत्कण्ठितम् पुरे ॥२-७१-४४॥
