2-Ayodhyakand / Sarga 71
Shloka 10
Shloka
स गङ्गाम् प्राग्वट्E तीर्त्वे समायात्कुटिकोष्ठिकाम् ।सबलस्ताम् स तीर्त्वाथ समायाद्धर्मवर्धनम् ॥२-७१-१०॥
