2-Ayodhyakand / Sarga 68
Shloka 5
Shloka
एहि सिद्ध अर्थ विजय जयन्त अशोक नन्दन ।श्रूयताम् इतिकर्तव्यम् सर्वान् एव ब्रवीमि वः ॥२-६८-५॥
Sarga 68 / Shloka 5 Ayodhyakand