2-Ayodhyakand / Sarga 64
Shloka 72
Shloka
निवृत्त वन वासम् तम् अयोध्याम् पुनर् आगतम् ।द्रक्ष्यन्ति सुखिनो रामम् शुक्रम् मार्ग गतम् यथा ॥२-६४-७२॥
