2-Ayodhyakand / Sarga 64
Shloka 45
Shloka
गो सहस्र प्रदातृऋणाम् या या गुरुभृताम् अपि ।देह न्यास कृताम् या च ताम् गतिम् गच्च पुत्रक ॥२-६४-४५॥
Sarga 64 / Shloka 45 Ayodhyakand
