2-Ayodhyakand / Sarga 64
Shloka 28
Shloka
रुधिरेण अवसित अन्गम् प्रकीर्ण अजिन वाससम् ।शयानम् भुवि निह्सम्ज्ञम् धर्म राज वशम् गतम् ॥२-६४-२८॥
Sarga 64 / Shloka 28 Ayodhyakand