2-Ayodhyakand / Sarga 63
Shloka 12
Shloka
तत् इदम् मे अनुसम्प्राप्तम् देवि दुह्खम् स्वयम् कृतम् ।सम्मोहात् इह बालेन यथा स्यात् भक्षितम् विषम् ॥२-६३-१२॥
