2-Ayodhyakand / Sarga 60
Shloka 17
Shloka
सदृशम् शत पत्रस्य पूर्ण चन्द्र उपम प्रभम् ।वदनम् तत् वदान्याया वैदेह्या न विकम्पते ॥२-६०-१७॥
Sarga 60 / Shloka 17 Ayodhyakand