2-Ayodhyakand / Sarga 58
Shloka 4
Shloka
राजा तु रजसा सूतम् ध्वस्त अङ्गम् समुपस्थितम् ।अश्रु पूर्ण मुखम् दीनम् उवाच परम आर्तवत् ॥२-५८-४॥
Sarga 58 / Shloka 4 Ayodhyakand