2-Ayodhyakand / Sarga 57
Shloka 31
Shloka
देव यस्या भयात् रामम् न अनुपृच्चसि सारथिम् ।न इह तिष्ठति कैकेयी विश्रब्धम् प्रतिभाष्यताम् ॥२-५७-३१॥
Sarga 57 / Shloka 31 Ayodhyakand