2-Ayodhyakand / Sarga 56
Shloka 37
Shloka
अनेक नाना मृग पक्षि सम्कुले ।विचित्र पुष्प स्तबलैः द्रुमैः युते ।
वन उत्तमे व्याल मृग अनुनादिते ।
तथा विजह्रुः सुसुखम् जित इन्द्रियाः ॥२-५६-३७॥
