2-Ayodhyakand / Sarga 55
Shloka 10
Shloka
रम्ये मार्दवयुक्तश्च वनदावैर्विपर्जितः ।इति पन्थानमावेद्य महर्षः स न्यवर्तत ॥२-५५-१०॥
Sarga 55 / Shloka 10 Ayodhyakand