2-Ayodhyakand / Sarga 52
Shloka 62
Shloka
परितुष्टा हि सा देवि वन वासम् गते मयि ।राजानम् न अतिशन्केत मिथ्या वादी इति धार्मिकम् ॥२-५२-६२॥
Sarga 52 / Shloka 62 Ayodhyakand
