2-Ayodhyakand / Sarga 52
Shloka 39
Shloka
कथम् हि त्वद् विहीनो अहम् प्रतियास्यामि ताम् पुरीम् ।तव तात वियोगेन पुत्र शोक आकुलाम् इव ॥२-५२-३९॥
Sarga 52 / Shloka 39 Ayodhyakand
