2-Ayodhyakand / Sarga 51
Shloka 23
Shloka
आराम उद्यान सम्पन्नाम् समाज उत्सव शालिनीम् ।सुखिता विचरिष्यन्ति राज धानीम् पितुर् मम ॥२-५१-२३॥
Sarga 51 / Shloka 23 Ayodhyakand