2-Ayodhyakand / Sarga 51
Shloka 21
Shloka
रम्य चत्वर सम्स्थानाम् सुविभक्त महा पथाम् ।हर्म्य प्रसाद सम्पन्नाम् गणिका वर शोभिताम् ॥२-५१-२१॥
Sarga 51 / Shloka 21 Ayodhyakand