2-Ayodhyakand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 51 / Shloka 12 Ayodhyakand

Kand 2-Ayodhyakand
Sarga 51
Shloka 12

Ayodhyakand

119 Sarga
27 Shloka
2/51/12
2-Ayodhyakand / Sarga 51 Shloka 12
Shloka
अस्मिन् प्रव्रजितः राजा न चिरम् वर्तयिष्यति ।
विधवा मेदिनी नूनम् क्षिप्रम् एव भविष्यति ॥२-५१-१२॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘गायत्री आदि मन्त्रोंके जप, कृच्छ्रचान्द्रायण आदि तप तथा नाना प्रकारके पराक्रम (यज्ञानुष्ठान आदि प्रयत्न) करनेसे जो महाराज दशरथको अपने समान उत्तम लक्षणोंसे युक्त ज्येष्ठ पुत्रके रूपमें प्राप्त हुए हैं, उन्हीं इन श्रीरामके वनमें आ जानेसे अब राजा दशरथ अधिक कालतक जीवन धारण नहीं कर सकेंगे। जान पड़ता है, निश्चय ही यह पृथ्वी अब शीघ्र विधवा हो जायगी॥ ११-१२॥