2-Ayodhyakand / Sarga 50
Shloka 6
Shloka
तेऽभिवाद्य महात्मानम् कृत्वा चापि प्रदक्षिणम् ।विलपन्तो नरा घोरम् व्यतिष्ठन्त क्वचित् क्वचित् ॥२-५०-६॥
Sarga 50 / Shloka 6 Ayodhyakand