2-Ayodhyakand / Sarga 50
Shloka 12
Shloka
तत्र त्रिपथगाम् दिव्याम् शिव तोयाम् अशैवलाम् ।ददर्श राघवो गन्गाम् पुण्याम् ऋषि निसेविताम् ॥२-५०-१२॥
Sarga 50 / Shloka 12 Ayodhyakand