2-Ayodhyakand / Sarga 49
Shloka 4
Shloka
शृण्वन् वाचो मनुष्याणाम् ग्राम सम्वास वासिनाम् ।राजानम् धिग् दशरथम् कामस्य वशम् आगतम् ॥२-४९-४॥
Sarga 49 / Shloka 4 Ayodhyakand