2-Ayodhyakand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 48 / Shloka 36 Ayodhyakand

Kand 2-Ayodhyakand
Sarga 48
Shloka 36

Ayodhyakand

119 Sarga
37 Shloka
2/48/36
2-Ayodhyakand / Sarga 48 Shloka 36
Shloka
तथा स्त्रियो राम निमित्तम् आतुरा ।
यथा सुते भ्रातरि वा विवासिते ।
विलप्य दीना रुरुदुर् विचेतसः ।
सुतैः हि तासाम् अधिको हि सो अभवत् ॥२-४८-३६॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उस समय नगरवासिनी स्त्रियाँ श्रीरामके लिये इस तरह शोकातुर हो रही थीं, मानो उनके सगे बेटे या भाईको देशनिकाला दे दिया गया हो। वे अत्यन्त दीनभावसे विलाप करके रोने लगीं और रोते-रोते अचेत हो गयीं; क्योंकि श्रीराम उनके लिये पुत्रों (तथा भाइयों)-से भी बढ़कर थे॥ ३६॥