2-Ayodhyakand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 36 / Shloka 26 Ayodhyakand

Kand 2-Ayodhyakand
Sarga 36
Shloka 26

Ayodhyakand

119 Sarga
32 Shloka
2/36/26
2-Ayodhyakand / Sarga 36 Shloka 26
Shloka
नहि कंचन पश्यामो राघवस्यागुणं वयम्।
दुर्लभो ह्यस्य निरयः शशाङ्कस्येव कल्मषम्॥ २७॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘असमञ्जने फाल और पिटारी लेकर पर्वतोंकी दुर्गम गुफाओंको ही अपने निवासके योग्य देखा और कन्द आदिके लिये वह सम्पूर्ण दिशाओंमें विचरने लगा। वह जैसा कि बताया गया है, पापाचारी था, इसलिये परम धार्मिक राजा सगरने उसको त्याग दिया था। श्रीरामने ऐसा कौन-सा अपराध किया है, जिसके कारण इन्हें इस तरह राज्य पानेसे रोका जा रहा है?॥