2-Ayodhyakand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 34 / Shloka 7 Ayodhyakand

Kand 2-Ayodhyakand
Sarga 34
Shloka 7

Ayodhyakand

119 Sarga
61 Shloka
2/34/7
2-Ayodhyakand / Sarga 34 Shloka 7
Shloka
स त्वां पश्यतु भद्रं ते रामः सत्यपराक्रमः।
सर्वान् सुहृद आपृच्छ्य त्वां हीदानीं दिदृक्षते॥ ७॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘पृथ्वीनाथ! आपके पुत्र ये सत्यपराक्रमी पुरुषसिंह श्रीराम ब्राह्मणों तथा आश्रित सेवकोंको अपना सारा धन देकर द्वारपर खड़े हैं। आपका कल्याण हो, ये अपने सब सुहृदोंसे मिलकर—उनसे विदा लेकर इस समय आपका दर्शन करना चाहते हैं। आज्ञा हो तो यहाँ आकर आपका दर्शन करें। राजन्! अब ये विशाल वनमें चले जायँगे, अत: किरणोंसे युक्त सूर्यकी भाँति समस्त राजोचित गुणसे सम्पन्न इन श्रीरामको आप भी जी भरकर देख लीजिये’॥ ६—८॥