2-Ayodhyakand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 34 / Shloka 23 Ayodhyakand

Kand 2-Ayodhyakand
Sarga 34
Shloka 23

Ayodhyakand

119 Sarga
61 Shloka
2/34/23
2-Ayodhyakand / Sarga 34 Shloka 23
Shloka
लक्ष्मणं चानुजानीहि सीता चान्वेतु मां वनम्।
कारणैर्बहुभिस्तथ्यैर्वार्यमाणौ न चेच्छतः॥ २३॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘मेरे साथ लक्ष्मणको भी वनमें जानेकी आज्ञा दीजिये। साथ ही यह भी स्वीकार कीजिये कि सीता भी मेरे साथ वनको जाय। मैंने बहुत-से सच्चे कारण बताकर इन दोनोंको रोकनेकी चेष्टा की है, परंतु ये यहाँ रहना नहीं चाहते हैं; अत: दूसरोंको मान देनेवाले नरेश! आप शोक छोड़कर हम सबको—मुझको, लक्ष्मणको और सीताको भी उसी तरह वनमें जानेकी आज्ञा दीजिये, जैसे ब्रह्माजीने अपने पुत्र सनकादिकोंको तपके लिये वनमें जानेकी अनुमति दी थी’॥ २३-२४॥