2-Ayodhyakand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 27 / Shloka 24 Ayodhyakand

Kand 2-Ayodhyakand
Sarga 27
Shloka 24

Ayodhyakand

119 Sarga
24 Shloka
2/27/24
2-Ayodhyakand / Sarga 27 Shloka 24
Shloka
तथा ब्रुवाणामपि धर्मवत्सलां
न च स्म सीतां नृवरो निनीषति।
उवाच चैनां बहु संनिवर्तने
वने निवासस्य च दुःखितां प्रति॥ २४॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

धर्ममें अनुरक्त रहनेवाली सीताके इस प्रकार प्रार्थना करनेपर भी नरश्रेष्ठ श्रीरामको उन्हें साथ ले जानेकी इच्छा नहीं हुई। वे उन्हें वनवासके विचारसे निवृत्त करनेके लिये वहाँके कष्टोंका अनेक प्रकारसे विस्तारपूर्वक वर्णन करने लगे॥ २४॥

Footnote

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें सत्ताईसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २७॥