2-Ayodhyakand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 25 / Shloka 47 Ayodhyakand

Kand 2-Ayodhyakand
Sarga 25
Shloka 47

Ayodhyakand

119 Sarga
47 Shloka
2/25/47
2-Ayodhyakand / Sarga 25 Shloka 47
Shloka
तया हि देव्या च कृतप्रदक्षिणो
निपीड्य मातुश्चरणौ पुनः पुनः।
जगाम सीतानिलयं महायशाः
स राघवः प्रज्वलितस्तया श्रिया॥ ४७॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

देवी कौसल्याने जब श्रीरामकी प्रदक्षिणा कर ली, तब महायशस्वी रघुनाथजी बारंबार माताके चरणोंको दबाकर प्रणाम करके माताकी मङ्गलकामना-जनित उत्कृष्ट शोभासे सम्पन्न हो सीताजीके महलकी ओर चल दिये॥ ४७॥

Footnote

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें पचीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २५॥