2-Ayodhyakand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 25 / Shloka 38 Ayodhyakand

Kand 2-Ayodhyakand
Sarga 25
Shloka 38

Ayodhyakand

119 Sarga
47 Shloka
2/25/38
2-Ayodhyakand / Sarga 25 Shloka 38
Shloka
औषधीं च सुसिद्धार्थां विशल्यकरणीं शुभाम्।
चकार रक्षां कौसल्या मन्त्रैरभिजजाप च॥ ३८॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

इस प्रकार आशीर्वाद देकर विशाललोचना भामिनी कौसल्याने पुत्रके मस्तकपर अक्षत रखकर चन्दन और रोली लगायी तथा सब मनोरथोंको सिद्ध करनेवाली विशल्यकरणी नामक शुभ ओषधि लेकर रक्षाके उद्देश्यसे मन्त्र पढ़ते हुए उसको श्रीरामके हाथमें बाँध दिया; फिर उसमें उत्कर्ष लानेके लिये मन्त्रका जप भी किया॥