2-Ayodhyakand / Sarga 24
Shloka 34
Shloka
कृतान्तस्य गतिः पुत्र दुर्विभाव्या सदा भुवि।यस्त्वां संचोदयति मे वच आविध्य राघव॥ ३५॥
Sarga 24 / Shloka 34 Ayodhyakand