2-Ayodhyakand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 23 / Shloka 27 Ayodhyakand

Kand 2-Ayodhyakand
Sarga 23
Shloka 27

Ayodhyakand

119 Sarga
41 Shloka
2/23/27
2-Ayodhyakand / Sarga 23 Shloka 27
Shloka
स चेद् राजन्यनेकाग्रे राज्यविभ्रमशङ्कया।
नैवमिच्छसि धर्मात्मन् राज्यं राम त्वमात्मनि॥ २७॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘धर्मात्मा श्रीराम! हमारे महाराज वानप्रस्थधर्मके पालनमें चित्तको एकाग्र नहीं कर रहे हैं, इसीलिये यदि आप यह समझते हों कि उनकी आज्ञाके विरुद्ध राज्य ग्रहण कर लेनेपर समस्त जनता विद्रोही हो जायगी, अत: राज्य अपने हाथमें नहीं रह सकेगा और इसी शङ्कासे यदि आप अपने ऊपर राज्यका भार नहीं लेना चाहते हैं अथवा वनमें चले जाना चाहते हैं तो इस शङ्काको छोड़ दीजिये॥ २७॥