2-Ayodhyakand / Sarga 15
Shloka 40
Shloka
स वाजियुक्तेन रथेन सारथिःसमाकुलं राजकुलं विराजयन्।
वरूथिना राजगृहाभिपातिना
पुरस्य सर्वस्य मनांसि हर्षयन्॥ ४०॥
