2-Ayodhyakand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 15 / Shloka 4 Ayodhyakand

Kand 2-Ayodhyakand
Sarga 15
Shloka 4

Ayodhyakand

119 Sarga
48 Shloka
2/15/4
2-Ayodhyakand / Sarga 15 Shloka 4
Shloka
अभिषेकाय रामस्य द्विजेन्द्रैरुपकल्पितम्।
काञ्चना जलकुम्भाश्च भद्रपीठं स्वलंकृतम्॥ ४॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

निर्मल सूर्योदय होनेपर दिनमें जब पुष्यनक्षत्रका योग आया तथा श्रीरामके जन्मका कर्क लग्न उपस्थित हुआ, उस समय श्रेष्ठ ब्राह्मणोंने श्रीरामके अभिषेकके लिये सारी सामग्री एकत्र करके उसे जँचाकर रख दिया। जलसे भरे हुए सोनेके कलश, भलीभाँति सजाया हुआ भद्रपीठ, चमकीले व्याघ्रचर्मसे अच्छी तरह आवृत रथ, गङ्गा-यमुनाके पवित्र सङ्गमसे लाया हुआ जल—ये सब वस्तुएँ एकत्र कर ली गयी थीं॥ ३—५॥