2-Ayodhyakand / Sarga 14
Shloka 68
Shloka
निर्जगाम महातेजा राघवस्य दिदृक्षया।सागरह्रदसंकाशात्सुमन्त्रोऽन्तःपुराच्छुभात्।
निष्क्रम्य जनसम्बाधं ददर्श द्वारमग्रतः॥ ६८॥
