2-Ayodhyakand / Sarga 14
Shloka 65
Shloka
सुमन्त्र रामं द्रक्ष्यामि शीघ्रमानय सुन्दरम्।स मन्यमानः कल्याणं हृदयेन ननन्द च॥ ६५॥
Sarga 14 / Shloka 65 Ayodhyakand