2-Ayodhyakand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 13 / Shloka 26 Ayodhyakand

Kand 2-Ayodhyakand
Sarga 13
Shloka 26

Ayodhyakand

119 Sarga
26 Shloka
2/13/26
2-Ayodhyakand / Sarga 13 Shloka 26
Shloka
इतीव राज्ञो व्यथितस्य सा निशा
जगाम घोरं श्वसतो मनस्विनः।
विबोध्यमानः प्रतिबोधनं तदा
निवारयामास स राजसत्तमः॥ २६॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

इस प्रकार व्यथित होकर भयंकर उच्छ्वास लेते हुए मनस्वी राजा दशरथकी वह रात धीरे-धीरे बीत गयी। प्रात:काल राजाको जगानेके लिये मनोहर वाद्योंके साथ मङ्गलगान होने लगा, परंतु उन राज-शिरोमणिने तत्काल मनाही भेजकर वह सब बंद करा दिया॥ २६॥

Footnote

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें तेरहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १३॥