2-Ayodhyakand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 10 / Shloka 29 Ayodhyakand

Kand 2-Ayodhyakand
Sarga 10
Shloka 29

Ayodhyakand

119 Sarga
40 Shloka
2/10/29
2-Ayodhyakand / Sarga 10 Shloka 29
Shloka
यदिदं मम दुःखाय शेषे कल्याणि पांसुषु।
भूमौ शेषे किमर्थं त्वं मयि कल्याणचेतसि॥ २९॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘कल्याणि! तुम जो इस तरह मुझे दु:ख देनेके लिये धूलमें लोट रही हो, इसका क्या कारण है? मेरे चित्तको मथ डालनेवाली सुन्दरी! मेरे मनमें तो सदा तुम्हारे कल्याणकी ही भावना रहती है। फिर मेरे रहते हुए तुम किस लिये धरतीपर सो रही हो? जान पड़ता है तुम्हारे चित्तपर किसी पिशाचने अधिकार कर लिया है॥२९॥