1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 9 / Shloka 13 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 9
Shloka 13

Balkand

77 Sarga
20 Shloka
1/9/13
1-Balkand / Sarga 9 Shloka 13
Shloka
आनाय्य तु महीपाल ऋष्यशृङ्गं सुसत्कृतम् ।
विभाण्डकसुतं राजन् ब्राह्मणं वेदपारगम् ।
प्रयच्छ कन्यां शान्तां वै विधिना सुसमाहितः ॥१-९-१३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘राजन्! विभाण्डकके पुत्र ऋष्यशृंग वेदोंके पारगामी विद्वान् हैं। भूपाल! आप सभी उपायोंसे उन्हें यहाँ ले आइये। बुलाकर उनका भलीभाँति सत्कार कीजिये। फिर एकाग्रचित्त हो वैदिक विधिके अनुसार उनके साथ अपनी कन्या शान्ताका विवाह कर दीजिये’॥ १२-१३॥