1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 8 / Shloka 12 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 8
Shloka 12

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/8/12
1-Balkand / Sarga 8 Shloka 12
Shloka
सरय्वाश्चोत्तरे तीरे यज्ञभूमिर्विधीयताम् ।
सर्वथा प्राप्स्यसे पुत्रानभिप्रेतांश्च पार्थिव ॥१-८-१२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

फिर वे सभी अत्यन्त प्रसन्न होकर राजा दशरथसे बोले—‘महाराज! यज्ञ-सामग्रीका संग्रह किया जाय। भूमण्डलमें भ्रमणके लिये यज्ञसम्बन्धी अश्व छोड़ा जाय तथा सरयूके उत्तर तटपर यज्ञभूमिका निर्माण किया जाय। तुम यज्ञद्वारा सर्वथा अपनी इच्छाके अनुरूप पुत्र प्राप्त कर लोगे; क्योंकि पुत्रके लिये तुम्हारे हृदयमें ऐसी धार्मिक बुद्धिका उदय हुआ है’॥ ११-१२