1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 77 / Shloka 8 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 77
Shloka 8

Balkand

77 Sarga
29 Shloka
1/77/8
1-Balkand / Sarga 77 Shloka 8
Shloka
सम्पूर्णां प्राविशद् राजा जनौघैः समलंकृताम्।
पौरैः प्रत्युद‍्गतो दूरं द्विजैश्च पुरवासिभिः ॥८॥

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1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

सड़कोंपर जलका छिड़काव हुआ था, जिससे पुरीकी सुरम्य शोभा बढ़ गयी थी। यत्र-तत्र ढेर-के-ढेर फूल बिखेरे गये थे। पुरवासी मनुष्य हाथोंमें मांगलिक वस्तुएँ लेकर राजाके प्रवेशमार्गपर प्रसन्नमुख होकर खड़े थे। इन सबसे भरी-पूरी तथा भारी जनसमुदायसे अलंकृत हुई अयोध्यापुरीमें राजाने प्रवेश किया। नागरिकों तथा पुरवासी ब्राह्मणोंने दूरतक आगे जाकर महाराजकी अगवानी की थी॥ ७-८॥