1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 77 / Shloka 7 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 77
Shloka 7

Balkand

77 Sarga
29 Shloka
1/77/7
1-Balkand / Sarga 77 Shloka 7
Shloka
सिक्तराजपथारम्यां प्रकीर्णकुसुमोत्कराम्।
राजप्रवेशसुमुखैः पौरैर्मङ्गलपाणिभिः ॥७॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

सड़कोंपर जलका छिड़काव हुआ था, जिससे पुरीकी सुरम्य शोभा बढ़ गयी थी। यत्र-तत्र ढेर-के-ढेर फूल बिखेरे गये थे। पुरवासी मनुष्य हाथोंमें मांगलिक वस्तुएँ लेकर राजाके प्रवेशमार्गपर प्रसन्नमुख होकर खड़े थे। इन सबसे भरी-पूरी तथा भारी जनसमुदायसे अलंकृत हुई अयोध्यापुरीमें राजाने प्रवेश किया। नागरिकों तथा पुरवासी ब्राह्मणोंने दूरतक आगे जाकर महाराजकी अगवानी की थी॥ ७-८॥