1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 77 / Shloka 6 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 77
Shloka 6

Balkand

77 Sarga
29 Shloka
1/77/6
1-Balkand / Sarga 77 Shloka 6
Shloka
चोदयामास तां सेनां जगामाशु ततः पुरीम्।
पताकाध्वजिनीं रम्यां तूर्योद‍्घुष्टनिनादिताम् ॥६॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

तदनन्तर उन्होंने सेनाको नगरकी ओर कूँच करनेकी आज्ञा दी और वहाँसे चलकर बड़ी शीघ्रताके साथ वे अयोध्यापुरीमें जा पहुँचे। उस समय उस पुरीमें सब ओर ध्वजा-पताकाएँ फहरा रही थीं। सजावटसे नगरकी रमणीयता बढ़ गयी थी और भाँति-भाँतिके वाद्योंकी ध्वनिसे सारी अयोध्या गूँज उठी थी॥ ६॥