1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 77 / Shloka 5 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 77
Shloka 5

Balkand

77 Sarga
29 Shloka
1/77/5
1-Balkand / Sarga 77 Shloka 5
Shloka
गतो राम इति श्रुत्वा हृष्टः प्रमुदितो नृपः।
पुनर्जातं तदा मेने पुत्रमात्मानमेव च ॥५॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

श्रीरामका यह वचन सुनकर राजा दशरथने अपने पुत्र रघुनाथजीको दोनों भुजाओंसे खींचकर छातीसे लगा लिया और उनका मस्तक सूँघा। ‘परशुरामजी चले गये’ यह सुनकर राजा दशरथको बड़ा हर्ष हुआ, वे आनन्दमग्न हो गये। उस समय उन्होंने अपना और अपने पुत्रका पुनर्जन्म हुआ माना॥ ४-५॥