1-Balkand / Sarga 77
Shloka 28
Shloka
अन्तर्गतमपि व्यक्तमाख्याति हृदयं हृदा।तस्य भूयो विशेषेण मैथिली जनकात्मजा।
देवताभिः समा रूपे सीता श्रीरिव रूपिणी ॥२८॥
